इन्होंने जन्म लेते ही अपनी कान्तिसे समस्त तेजस्वियोंका तेज छीन लिया। ये कर्म करनेमें बड़े दक्ष (कुशल) थे, इसीसे इनका नाम ‘दक्ष’ हुआ॥ ५०॥✎ 4244251349
यो जायमानः सर्वेषां तेजस्तेजस्विनां रुचा।
स्वयोपादत्त दाक्ष्याच्च कर्मणां दक्षमब्रुवन्॥ ५०
इन्होंने जन्म लेते ही अपनी कान्तिसे समस्त तेजस्वियोंका तेज छीन लिया। ये कर्म करनेमें बड़े दक्ष (कुशल) थे, इसीसे इनका नाम ‘दक्ष’ हुआ॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.30.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 569) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/30/50/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)