॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.5.21
पूष्णश्चापातयद्दन्तान् कालिंगस्य यथा बलः।
शप्यमाने गरिमणि योऽहसद्दर्शयन्दतः॥ २१
pūṣṇaścāpātayaddantān kāliṃgasya yathā balaḥ|
śapyamāne garimaṇi yo'hasaddarśayandataḥ|| 21
अर्थ
इसके पश्चात् जैसे अनिरुद्धके विवाहके समय बलरामजीने कलिंगराजके दाँत उखाड़े थे, उसी प्रकार उन्होंने पूषाके दाँत तोड़ दिये; क्योंकि जब दक्षने महादेवजीको गालियाँ दी थीं, उस समय ये दाँत दिखाकर हँसे थे॥ २१॥