उन्होंने क्रोधमें भरकर भगदेवताको पृथ्वीपर पटक दिया और उनकी आँखें निकाल लीं; क्योंकि जब दक्ष देवसभामें श्रीमहादेवजीको बुरा-भला कहते हुए शाप दे रहे थे, उस समय इन्होंने दक्षको सैन देकर उकसाया था॥ २०॥
भगस्य नेत्रे भगवान् पातितस्य रुषा भुवि।
उज्जहार सदस्थोऽक्ष्णा यः शपन्तमसूसुचत्॥ २०
उन्होंने क्रोधमें भरकर भगदेवताको पृथ्वीपर पटक दिया और उनकी आँखें निकाल लीं; क्योंकि जब दक्ष देवसभामें श्रीमहादेवजीको बुरा-भला कहते हुए शाप दे रहे थे, उस समय इन्होंने दक्षको सैन देकर उकसाया था॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.5.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 427) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/5/20/