॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.6.1
अथ षष्ठोऽध्यायः
ब्रह्मादि देवताओंका कैलास जाकर श्रीमहादेवजीको मनाना
मैत्रेय उवाच
अथ देवगणाः सर्वे रुद्रानीकैः पराजिताः।
शूलपट्टिशनिस्त्रिंशगदापरिघमुद्गरैः ॥ १
atha devagaṇāḥ sarve rudrānīkaiḥ parājitāḥ|
śūlapaṭṭiśanistriṃśagadāparighamudgaraiḥ || 1
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! इस प्रकार जब रुद्रके सेवकोंने समस्त देवताओंको हरा दिया और उनके सम्पूर्ण अंग-प्रत्यंग भूत-प्रेतोंके त्रिशूल, पट्टिश, खड्ग, गदा, परिघ और मुद्गर आदि आयुधोंसे छिन्न-भिन्न हो गये तब वे ऋत्विज् और सदस्योंके सहित बहुत ही डरकर ब्रह्माजीके पास पहुँचे और प्रणाम करके उन्हें सारा वृत्तान्त कह सुनाया ॥ १-२॥✎ 1918