॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.6.10
नानामणिमयैः शृङ्गैर्नानाधातुविचित्रितैः।
नानाद्रुमलतागुल्मैर्नानामृगगणावृतैः ॥ १०
nānāmaṇimayaiḥ śṛṅgairnānādhātuvicitritaiḥ|
nānādrumalatāgulmairnānāmṛgagaṇāvṛtaiḥ || 10
अर्थ
उसके मणिमय शिखर हैं, जो नाना प्रकारकी धातुओंसे रंग-बिरंगे प्रतीत होते हैं। उसपर अनेक प्रकारके वृक्ष, लता और गुल्मादि छाये हुए हैं, जिनमें झुंड-के-झुंड जंगली पशु विचरते रहते हैं॥ १०॥