॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.6.9
जन्मौषधितपोमन्त्रयोगसिद्धैर्नरेतरैः ।
जुष्टं किन्नरगन्धर्वैरप्सरोभिर्वृतं सदा॥ ९
janmauṣadhitapomantrayogasiddhairnaretaraiḥ |
juṣṭaṃ kinnaragandharvairapsarobhirvṛtaṃ sadā|| 9
अर्थ
उस कैलासपर ओषधि, तप, मन्त्र तथा योग आदि उपायोंसे सिद्धिको प्राप्त हुए और जन्मसे ही सिद्ध देवता नित्य निवास करते हैं; किन्नर, गन्धर्व और अप्सरादि सदा वहाँ बने रहते हैं॥ ९॥