श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

जन्मौषधितपोमन्त्रयोगसिद्धैर्नरेतरैः ।

जुष्टं किन्‍नरगन्धर्वैरप्सरोभिर्वृतं सदा॥ ९

janmauṣadhitapomantrayogasiddhairnaretaraiḥ |

juṣṭaṃ kinnaragandharvairapsarobhirvṛtaṃ sadā|| 9

अर्थ

उस कैलासपर ओषधि, तप, मन्त्र तथा योग आदि उपायोंसे सिद्धिको प्राप्त हुए और जन्मसे ही सिद्ध देवता नित्य निवास करते हैं; किन्‍नर, गन्धर्व और अप्सरादि सदा वहाँ बने रहते हैं॥ ९॥

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