श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स इत्थमादिश्य सुरानजस्तैः

समन्वितः पितृभिः सप्रजेशैः।

ययौ स्वधिष्ण्यान्‍निलयं पुरद्विषः

कैलासमद्रिप्रवरं प्रियं प्रभोः॥ ८

sa itthamādiśya surānajastaiḥ

samanvitaḥ pitṛbhiḥ saprajeśaiḥ|

yayau svadhiṣṇyānnilayaṃ puradviṣaḥ

kailāsamadripravaraṃ priyaṃ prabhoḥ|| 8

अर्थ

देवताओंसे इस प्रकार कहकर ब्रह्माजी उनको, प्रजापतियोंको और पितरोंको साथ ले अपने लोकसे पर्वतश्रेष्ठ कैलासको गये, जो भगवान् शंकरका प्रिय धाम है॥ ८॥

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