श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.19

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

कुमुदोत्पलकह्लारशतपत्रवनर्द्धिभिः ।

नलिनीषु कलं कूजत्खगवृन्दोपशोभितम्॥ १९

kumudotpalakahlāraśatapatravanarddhibhiḥ |

nalinīṣu kalaṃ kūjatkhagavṛndopaśobhitam|| 19

अर्थ

उसके सरोवरोंमें कुमुद, उत्पल, कल्हार और शतपत्र आदि अनेक जातिके कमल खिले रहते हैं। उनकी शोभासे मुग्ध होकर कलरव करते हुए झुंड-के-झुंड पक्षियोंसे वह बड़ा ही भला लगता है॥ १९॥✎ 1318

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1318 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हैैं॥ → हैं॥

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