उस नगरके बाहरकी ओर नन्दा और अलकनन्दा नामकी दो नदियाँ हैं; वे तीर्थपाद श्रीहरिकी चरण-रजके संयोगसे अत्यन्त पवित्र हो गयी हैं॥ २४॥✎ 1976
नन्दा चालकनन्दा च सरितौ बाह्यतः पुरः।
तीर्थपादपदाम्भोजरजसातीव पावने॥ २४
उस नगरके बाहरकी ओर नन्दा और अलकनन्दा नामकी दो नदियाँ हैं; वे तीर्थपाद श्रीहरिकी चरण-रजके संयोगसे अत्यन्त पवित्र हो गयी हैं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.6.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 430) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/6/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1976 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): उसमें → उनमें