॥ श्रीहरिः ॥
तस्मिन्महायोगमये मुमुक्षुशरणे सुराः।
ददृशुः शिवमासीनं त्यक्तामर्षमिवान्तकम्॥ ३३
tasminmahāyogamaye mumukṣuśaraṇe surāḥ|
dadṛśuḥ śivamāsīnaṃ tyaktāmarṣamivāntakam|| 33
अर्थ
उस महायोगमय और मुमुक्षुओंके आश्रयभूत वृक्षके नीचे देवताओंने भगवान् शंकरको विराजमान देखा। वे साक्षात् क्रोधहीन कालके समान जान पड़ते थे॥ ३३॥
तस्मिन्महायोगमये मुमुक्षुशरणे सुराः।
ददृशुः शिवमासीनं त्यक्तामर्षमिवान्तकम्॥ ३३
उस महायोगमय और मुमुक्षुओंके आश्रयभूत वृक्षके नीचे देवताओंने भगवान् शंकरको विराजमान देखा। वे साक्षात् क्रोधहीन कालके समान जान पड़ते थे॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.6.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 431) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/6/33/