श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.6.34

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सनन्दनाद्यैर्महासिद्धैः शान्तैः संशान्तविग्रहम्।

उपास्यमानं सख्या च भर्त्रा गुह्यकरक्षसाम्॥ ३४

sanandanādyairmahāsiddhaiḥ śāntaiḥ saṃśāntavigraham|

upāsyamānaṃ sakhyā ca bhartrā guhyakarakṣasām|| 34

अर्थ

भगवान् भूतनाथका श्रीअंग बड़ा ही शान्त था। सनन्दनादि शान्त सिद्धगण और सखा—यक्ष-राक्षसोंके स्वामी कुबेर उनकी सेवा कर रहे थे॥ ३४॥

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