॥ श्रीहरिः ॥
तदा सर्वाणि भूतानि श्रुत्वा मीढुष्टमोदितम्।
परितुष्टात्मभिस्तात साधु साध्वित्यथाब्रुवन्॥ ६
tadā sarvāṇi bhūtāni śrutvā mīḍhuṣṭamoditam|
parituṣṭātmabhistāta sādhu sādhvityathābruvan|| 6
अर्थ
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—वत्स विदुर! तब भगवान् शंकरके वचन सुनकर सब लोग प्रसन्न चित्तसे ‘धन्य! धन्य!’ कहने लगे॥ ६॥
तदा सर्वाणि भूतानि श्रुत्वा मीढुष्टमोदितम्।
परितुष्टात्मभिस्तात साधु साध्वित्यथाब्रुवन्॥ ६
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—वत्स विदुर! तब भगवान् शंकरके वचन सुनकर सब लोग प्रसन्न चित्तसे ‘धन्य! धन्य!’ कहने लगे॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 434) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/7/6/