वहाँ जैसा-जैसा भगवान् शंकरने कहा था, उसी प्रकार सब कार्य करके उन्होंने दक्षकी धड़से यज्ञपशुका सिर जोड़ दिया॥ ८॥
विधाय कार्त्स्न्येन च तद्यदाह भगवान् भवः।
संदधुः कस्य कायेन सवनीयपशोः शिरः॥ ८
वहाँ जैसा-जैसा भगवान् शंकरने कहा था, उसी प्रकार सब कार्य करके उन्होंने दक्षकी धड़से यज्ञपशुका सिर जोड़ दिया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 434) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/7/8/