॥ श्रीहरिः ॥
संधीयमाने शिर४सि दक्षो रुद्राभिवीक्षितः।
सद्यः सुप्त इवोत्तस्थौ ददृशे चाग्रतो मृडम्॥ ९
saṃdhīyamāne śirasi dakṣo rudrābhivīkṣitaḥ|
sadyaḥ supta ivottasthau dadṛśe cāgrato mṛḍam|| 9
अर्थ
सिर जुड़ जानेपर रुद्रदेवकी दृष्टि पड़ते ही दक्ष तत्काल सोकर जागनेके समान जी उठे और अपने सामने भगवान् शिवको देखा॥ ९॥
संधीयमाने शिरसि दक्षो रुद्राभिवीक्षितः।
सद्यः सुप्त इवोत्तस्थौ ददृशे चाग्रतो मृडम्॥ ९
सिर जुड़ जानेपर रुद्रदेवकी दृष्टि पड़ते ही दक्ष तत्काल सोकर जागनेके समान जी उठे और अपने सामने भगवान् शिवको देखा॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.7.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 434) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/7/9/टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—शीर्ष्णीह।
(मुद्रित पृष्ठ 434)