श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.11

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

न वत्स नृपतेर्धिष्ण्यं भवानारोढुमर्हति।

न गृहीतो मया यत्त्वं कुक्षावपि नृपात्मजः॥ ११

na vatsa nṛpaterdhiṣṇyaṃ bhavānāroḍhumarhati|

na gṛhīto mayā yattvaṃ kukṣāvapi nṛpātmajaḥ|| 11

अर्थ

‘बच्चे! तू राजसिंहासनपर बैठनेका अधिकारी नहीं है। तू भी राजाका ही बेटा है, इससे क्या हुआ; तुझको मैंने तो अपनी कोखमें नहीं धारण किया॥ ११॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें