श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—ध्रुवकी बात सुनकर भगवान् नारदजी बड़े प्रसन्न हुए और उसपर कृपा करके इस प्रकार सदुपदेश देने लगे॥ ३९॥
इत्युदाहृतमाकर्ण्य भगवान्नारदस्तदा।
प्रीतः प्रत्याह तं बालं सद्वाक्यमनुकम्पया॥ ३९
श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—ध्रुवकी बात सुनकर भगवान् नारदजी बड़े प्रसन्न हुए और उसपर कृपा करके इस प्रकार सदुपदेश देने लगे॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.8.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 447) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/8/39/