श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.39

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

इत्युदाहृतमाकर्ण्य भगवान्‍नारदस्तदा।

प्रीतः प्रत्याह तं बालं सद्वाक्यमनुकम्पया॥ ३९

ityudāhṛtamākarṇya bhagavānnāradastadā|

prītaḥ pratyāha taṃ bālaṃ sadvākyamanukampayā|| 39

अर्थ

श्रीमैत्रेयजी कहते हैं—ध्रुवकी बात सुनकर भगवान् नारदजी बड़े प्रसन्‍न हुए और उसपर कृपा करके इस प्रकार सदुपदेश देने लगे॥ ३९॥

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