॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.8.40
नारद उवाच
जनन्याभिहितः पन्थाः स वै निःश्रेयसस्य ते।
भगवान् वासुदेवस्तं भज तत्प्रवणात्मना॥ ४०
jananyābhihitaḥ panthāḥ sa vai niḥśreyasasya te|
bhagavān vāsudevastaṃ bhaja tatpravaṇātmanā|| 40
अर्थ
श्रीनारदजीने कहा—बेटा! तेरी माता सुनीतिने तुझे जो कुछ बताया है, वही तेरे लिये परम कल्याणका मार्ग है। भगवान् वासुदेव ही वह उपाय हैं, इसलिये तू चित्त लगाकर उन्हींका भजन कर॥ ४०॥