श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.8.79

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

यदैकपादेन स पार्थिवार्भक-

स्तस्थौ तदङ्गुष्ठनिपीडिता मही।

ननाम तत्रार्धमिभेन्द्रधिष्ठिता

तरीव सव्येतरतः पदे पदे॥ ७९

yadaikapādena sa pārthivārbhaka-

stasthau tadaṅguṣṭhanipīḍitā mahī|

nanāma tatrārdhamibhendradhiṣṭhitā

tarīva savyetarataḥ pade pade|| 79

अर्थ

जब राजकुमार ध्रुव एक पैरसे खड़े हुए, तब उनके अँगूठेसे दबकर आधी पृथ्वी इस प्रकार झुक गयी, जैसे किसी गजराजके चढ़ जानेपर नाव पद-पदपर दायीं-बायीं ओर डगमगाने लगती है॥ ७९॥

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