श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.19

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

श्रीभगवानुवाच

वेदाहं ते व्यवसितं हृदि राजन्यबालक।

तत्प्रयच्छामि भद्रं ते दुरापमपि सुव्रत॥ १९

vedāhaṃ te vyavasitaṃ hṛdi rājanyabālaka|

tatprayacchāmi bhadraṃ te durāpamapi suvrata|| 19

अर्थ

श्रीभगवान्‌ने कहा—उत्तम व्रतका पालन करनेवाले राजकुमार! मैं तेरे हृदयका संकल्प जानता हूँ। यद्यपि उस पदका प्राप्त होना बहुत कठिन है, तो भी मैं तुझे वह देता हूँ। तेरा कल्याण हो॥ १९॥✎ 376

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #376 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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