॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.9.40
शङ्खदुन्दुभिनादेन ब्रह्मघोषेण वेणुभिः।
निश्चक्राम पुरात्तूर्णमात्मजाभीक्षणोत्सुकः॥ ४०
śaṅkhadundubhinādena brahmaghoṣeṇa veṇubhiḥ|
niścakrāma purāttūrṇamātmajābhīkṣaṇotsukaḥ|| 40
अर्थ
राजा उत्तानपादने पुत्रका मुख देखनेके लिये उत्सुक होकर बहुत-से ब्राह्मण, कुलके बड़े-बूढ़े, मन्त्री और बन्धुजनोंको साथ लिया तथा एक बढ़िया घोड़ोंवाले सुवर्णजटित रथपर सवार होकर वे झटपट नगरके बाहर आये। उनके आगे-आगे वेदध्वनि होती जाती थी तथा शंख, दुन्दुभि एवं वंशी आदि अनेकों मांगलिक बाजे बजते जाते थे॥ ३९-४०॥✎ 1946