श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.41

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सुनीतिः सुरुचिश्चास्य महिष्यौ रुक्मभूषिते।

आरुह्य शिबिकां सार्धमुत्तमेनाभिजग्मतुः॥ ४१

sunītiḥ suruciścāsya mahiṣyau rukmabhūṣite|

āruhya śibikāṃ sārdhamuttamenābhijagmatuḥ|| 41

अर्थ

उनकी दोनों रानियाँ सुनीति और सुरुचि भी सुवर्णमय आभूषणोंसे विभूषित हो राजकुमार उत्तमके साथ पालकियोंपर चढ़कर चल रही थीं॥ ४१॥✎ 1946

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1946 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): बिभूषित → विभूषित

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