जिन अनेकों परकोटों, फाटकों और महलोंसे नगरी सुशोभित थी, उन सबको सुवर्णकी सामग्रियोंसे सजाया गया था तथा उनके कँगूरे विमानोंके शिखरोंके समान चमक रहे थे॥ ५६॥
प्राकारैर्गोपुरागारैः शातकुम्भपरिच्छदैः।
सर्वतोऽलंकृतं श्रीमद्विमानशिखरद्युभिः॥ ५६
जिन अनेकों परकोटों, फाटकों और महलोंसे नगरी सुशोभित थी, उन सबको सुवर्णकी सामग्रियोंसे सजाया गया था तथा उनके कँगूरे विमानोंके शिखरोंके समान चमक रहे थे॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 459) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/56/