॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.9.57
मृष्टचत्वररथ्याट्टमार्गं चन्दनचर्चितम्।
लाजाक्षतैः पुष्पफलैस्तण्डुलैर्बलिभिर्युतम्॥ ५७
mṛṣṭacatvararathyāṭṭamārgaṃ candanacarcitam|
lājākṣataiḥ puṣpaphalaistaṇḍulairbalibhiryutam|| 57
अर्थ
नगरके चौक, गलियों, अटारियों और सड़कोंको झाड़-बुहारकर उनपर चन्दनका छिड़काव किया गया था और जहाँ-तहाँ खील, चावल, पुष्प, फल, जौ एवं अन्य मांगलिक उपहार-सामग्रियाँ सजी रखी थीं॥ ५७॥