॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.9.64
वाप्यो वैदूर्यसोपानाः पद्मोत्पलकुमुद्वतीः।
हंसकारण्डवकुलैर्जुष्टाश्चक्राह्वसारसैः ॥ ६४
vāpyo vaidūryasopānāḥ padmotpalakumudvatīḥ|
haṃsakāraṇḍavakulairjuṣṭāścakrāhvasārasaiḥ || 64
अर्थ
उन बगीचोंमें वैदूर्यमणि (पुखराज)-की सीढ़ियोंसे सुशोभित बावलियाँ थीं—जिनमें लाल, नीले और सफेद रंगके कमल खिले रहते थे तथा हंस, कारण्डव, चकवा एवं सारस आदि पक्षी क्रीडा करते रहते थे॥ ६४॥