राजर्षि उत्तानपादने अपने पुत्रके अति अद्भुत प्रभावकी बात देवर्षि नारदसे पहले ही सुन रखी थी; अब उसे प्रत्यक्ष वैसा ही देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ॥ ६५॥
उत्तानपादो राजर्षिः प्रभावं तनयस्य तम्।
श्रुत्वा दृष्ट्वाद्भुततमं प्रपेदे विस्मयं परम्॥ ६५
राजर्षि उत्तानपादने अपने पुत्रके अति अद्भुत प्रभावकी बात देवर्षि नारदसे पहले ही सुन रखी थी; अब उसे प्रत्यक्ष वैसा ही देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ॥ ६५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.9.65 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 460) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/9/65/