श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.1.39

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तस्य ह वा एते श्लोकाः—

प्रियव्रतकृतं कर्म को नु कुर्याद्विनेश्‍वरम्।

यो नेमिनिम्नैरकरोच्छायां घ्नन् सप्त वारिधीन्॥ ३९

tasya ha vā ete ślokāḥ—

priyavratakṛtaṃ karma ko nu kuryādvineśvaram|

yo neminimnairakarocchāyāṃ ghnan sapta vāridhīn|| 39

अर्थ

महाराज प्रियव्रतके विषयमें निम्नलिखित लोकोक्ति प्रसिद्ध है—

यह व्याख्या श्लोक 5.1.39 से 5.1.41 तककी एक साथ है।

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