॥ श्रीहरिः ॥
भूसंस्थानं कृतं येन सरिद्गिरिवनादिभिः।
सीमा च भूतनिर्वृत्यै द्वीपे द्वीपे विभागशः॥ ४०
bhūsaṃsthānaṃ kṛtaṃ yena saridgirivanādibhiḥ|
sīmā ca bhūtanirvṛtyai dvīpe dvīpe vibhāgaśaḥ|| 40
अर्थ
महाराज प्रियव्रतके विषयमें निम्नलिखित लोकोक्ति प्रसिद्ध है—
यह व्याख्या श्लोक 5.1.39 से 5.1.41 तककी एक साथ है।
भूसंस्थानं कृतं येन सरिद्गिरिवनादिभिः।
सीमा च भूतनिर्वृत्यै द्वीपे द्वीपे विभागशः॥ ४०
महाराज प्रियव्रतके विषयमें निम्नलिखित लोकोक्ति प्रसिद्ध है—
श्रीमद्भागवत महापुराण 5.1.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 582) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/5/1/40/