श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 5.1.40

पञ्चम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

भूसंस्थानं कृतं येन सरिद्गिरिवनादिभिः।

सीमा च भूतनिर्वृत्यै द्वीपे द्वीपे विभागशः॥ ४०

bhūsaṃsthānaṃ kṛtaṃ yena saridgirivanādibhiḥ|

sīmā ca bhūtanirvṛtyai dvīpe dvīpe vibhāgaśaḥ|| 40

अर्थ

महाराज प्रियव्रतके विषयमें निम्नलिखित लोकोक्ति प्रसिद्ध है—

यह व्याख्या श्लोक 5.1.39 से 5.1.41 तककी एक साथ है।

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