श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.34

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

तेभ्यो हिरण्यं रजतं वासांस्याभरणानि च।

ग्रामान् हयान् गजान् प्रादाद् धेनूनामर्बुदानि षट्॥ ३४

tebhyo hiraṇyaṃ rajataṃ vāsāṃsyābharaṇāni ca|

grāmān hayān gajān prādād dhenūnāmarbudāni ṣaṭ|| 34

अर्थ

उन्होंने उन ब्राह्मणोंको सोना, चाँदी, वस्त्र, आभूषण, गाँव, घोड़े, हाथी और छः अर्बुद गौएँ दान कीं॥ ३४॥

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