इस प्रकार एक तो वे रानियाँ सन्तान न होनेके कारण ही दुःखी थीं, दूसरे राजा चित्रकेतुने उनकी उपेक्षा कर दी। अतः वे डाहसे अपनेको धिक्कारने और मन-ही-मन जलने लगीं॥ ३९॥
ताः पर्यतप्यन्नात्मानं गर्हयन्त्योऽभ्यसूयया।
आनपत्येन दुःखेन राज्ञोऽनादरणेन च॥ ३९
इस प्रकार एक तो वे रानियाँ सन्तान न होनेके कारण ही दुःखी थीं, दूसरे राजा चित्रकेतुने उनकी उपेक्षा कर दी। अतः वे डाहसे अपनेको धिक्कारने और मन-ही-मन जलने लगीं॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 772) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/39/