द्वेषके कारण रानियोंकी बुद्धि मारी गयी। उनके चित्तमें क्रूरता छा गयी। उन्हें अपने पति चित्रकेतुका पुत्र-स्नेह सहन न हुआ। इसलिये उन्होंने चिढ़कर नन्हेसे राजकुमारको विष दे दिया॥ ४३॥✎ 540
विद्वेषनष्टमतयः स्त्रियो दारुणचेतसः।
गरं ददुः कुमाराय दुर्मर्षा नृपतिं प्रति॥ ४३
द्वेषके कारण रानियोंकी बुद्धि मारी गयी। उनके चित्तमें क्रूरता छा गयी। उन्हें अपने पति चित्रकेतुका पुत्र-स्नेह सहन न हुआ। इसलिये उन्होंने चिढ़कर नन्हेसे राजकुमारको विष दे दिया॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 772) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/14/43/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)