परीक्षित्! इस प्रकार परम वरदानी भगवान् लक्ष्मी-नारायणकी स्तुति करके वहाँसे नैवेद्य हटा दे और आचमन कराके पूजा करे॥ १५॥✎ 5585595605611614
इत्यभिष्टूय वरदं श्रीनिवासं श्रिया सह।
तन्निःसार्योपहरणं दत्त्वाऽऽचमनमर्चयेत्॥ १५
परीक्षित्! इस प्रकार परम वरदानी भगवान् लक्ष्मी-नारायणकी स्तुति करके वहाँसे नैवेद्य हटा दे और आचमन कराके पूजा करे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 803) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/19/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)