श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.4

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

यद्यदाचरति श्रेयानितरस्तत्तदीहते।

स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥ ४

yadyadācarati śreyānitarastattadīhate|

sa yatpramāṇaṃ kurute lokastadanuvartate|| 4

अर्थ

सत्पुरुष जैसा आचरण करते हैं, साधारण लोग भी वैसा ही करते हैं। वे अपने आचरणके द्वारा जिस कर्मको धर्मानुकूल प्रमाणित कर देते हैं, लोग उसीका अनुकरण करने लगते हैं॥ ४॥

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