सत्पुरुष जैसा आचरण करते हैं, साधारण लोग भी वैसा ही करते हैं। वे अपने आचरणके द्वारा जिस कर्मको धर्मानुकूल प्रमाणित कर देते हैं, लोग उसीका अनुकरण करने लगते हैं॥ ४॥
यद्यदाचरति श्रेयानितरस्तत्तदीहते।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥ ४
सत्पुरुष जैसा आचरण करते हैं, साधारण लोग भी वैसा ही करते हैं। वे अपने आचरणके द्वारा जिस कर्मको धर्मानुकूल प्रमाणित कर देते हैं, लोग उसीका अनुकरण करने लगते हैं॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 703) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/2/4/