श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.31

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

भ्रातॄणां प्रायणं भ्राता योऽनुतिष्ठति धर्मवित्।✎ 1076

स पुण्यबन्धुः पुरुषो मरुद्भिः सह मोदते॥ ३१

bhrātṝṇāṃ prāyaṇaṃ bhrātā yo'nutiṣṭhati dharmavit|

sa puṇyabandhuḥ puruṣo marudbhiḥ saha modate|| 31

अर्थ

जो धर्मज्ञ भाई अपने बड़े भाइयोंके श्रेष्ठ मार्गका अनुसरण करता है, वही सच्चा भाई है! वह पुण्यवान् पुरुष परलोकमें मरुद्गणोंके साथ आनन्द भोगता है॥ ३१॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1076 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भ्रातृणां → भ्रातॄणां

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें