यज्ञ समाप्त होनेपर अन्वाहार्य-पचन नामक अग्नि (दक्षिणाग्नि)-से एक बड़ा भयावना दैत्य प्रकट हुआ। वह ऐसा जान पड़ता था, मानो लोकोंका नाश करनेके लिये प्रलयकालीन विकराल काल ही प्रकट हुआ हो॥ १२॥
अथान्वाहार्यपचनादुत्थितो घोरदर्शनः।
कृतान्त इव लोकानां युगान्तसमये यथा॥ १२
यज्ञ समाप्त होनेपर अन्वाहार्य-पचन नामक अग्नि (दक्षिणाग्नि)-से एक बड़ा भयावना दैत्य प्रकट हुआ। वह ऐसा जान पड़ता था, मानो लोकोंका नाश करनेके लिये प्रलयकालीन विकराल काल ही प्रकट हुआ हो॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 745) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/9/12/