श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.19

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

कथं तस्मिन् भगवति दुरवग्राहधामनि।

पश्यतां सर्वलोकानां लयमीयतुरञ्जसा॥ १९

kathaṃ tasmin bhagavati duravagrāhadhāmani|

paśyatāṃ sarvalokānāṃ layamīyaturañjasā|| 19

अर्थ

प्रत्युत जिन भगवान्‌की प्राप्ति अत्यन्त कठिन है, उन्हींमें ये दोनों सबके देखते-देखते अनायास ही लीन हो गये—इसका क्या कारण है?॥ १९॥✎ 564 565 566 567

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #564 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #565 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #566 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #567 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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