नारदजी कहते हैं—प्रह्लादजीने बालक होनेपर भी यही समझा कि वरदान माँगना प्रेम-भक्तिका विघ्न है; इसलिये कुछ मुसकराते हुए वे भगवान्से बोले॥ १॥✎ 624
भक्तियोगस्य तत् सर्वमन्तरायतयार्भकः।
मन्यमानो हृषीकेशं स्मयमान उवाच ह॥ १
नारदजी कहते हैं—प्रह्लादजीने बालक होनेपर भी यही समझा कि वरदान माँगना प्रेम-भक्तिका विघ्न है; इसलिये कुछ मुसकराते हुए वे भगवान्से बोले॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 867) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)