श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.23

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

पित्र्यं च स्थानमातिष्ठ यथोक्तं ब्रह्मवादिभिः।

मय्यावेश्य मनस्तात कुरु कर्माणि मत्परः॥ २३

pitryaṃ ca sthānamātiṣṭha yathoktaṃ brahmavādibhiḥ|

mayyāveśya manastāta kuru karmāṇi matparaḥ|| 23

अर्थ

वत्स! तुम अपने पिताके पदपर स्थित हो जाओ और वेदवादी मुनियोंकी आज्ञाके अनुसार मुझमें अपना मन लगाकर और मेरी शरणमें रहकर मेरी सेवाके लिये ही अपने सारे कार्य करो॥ २३॥✎ 626 2024

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #626 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीनृसिंहभगवान् ने → श्रीनृसिंहभगवान्‌ने
  • #2024 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): ढि़ → ढ़ि

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