सायंकाल और प्रातःकाल गुरु, अग्नि, सूर्य और श्रेष्ठ देवताओंकी उपासना करे और मौन होकर एकाग्रतासे गायत्रीका जप करता हुआ दोनों समयकी सन्ध्या करे॥ २॥
सायं प्रातरुपासीत गुर्वग्न्यर्कसुरोत्तमान्।
उभे सन्ध्ये च यतवाग् जपन्ब्रह्म समाहितः॥ २
सायंकाल और प्रातःकाल गुरु, अग्नि, सूर्य और श्रेष्ठ देवताओंकी उपासना करे और मौन होकर एकाग्रतासे गायत्रीका जप करता हुआ दोनों समयकी सन्ध्या करे॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.12.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 879) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/12/2/