श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.13.22

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

अथापि ब्रूमहे प्रश्नांस्तव राजन्यथाश्रुतम्।

सम्भावनीयो हि भवानात्मनः शुद्धिमिच्छताम्॥ २२

athāpi brūmahe praśnāṃstava rājanyathāśrutam|

sambhāvanīyo hi bhavānātmanaḥ śuddhimicchatām|| 22

अर्थ

तो भी प्रह्लाद! मैंने जैसा कुछ जाना है, उसके अनुसार मैं तुम्हारे प्रश्नोंका उत्तर देता हूँ। क्योंकि आत्मशुद्धिके अभिलाषियोंको तुम्हारा सम्मान अवश्य करना चाहिये॥ २२॥

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