श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.5.35

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

अयं मे भ्रातृहा सोऽयं हित्वा स्वान् सुहृदोऽधमः।

पितृव्यहन्तुर्यः पादौ विष्णोर्दासवदर्चति॥ ३५

ayaṃ me bhrātṛhā so'yaṃ hitvā svān suhṛdo'dhamaḥ|

pitṛvyahanturyaḥ pādau viṣṇordāsavadarcati|| 35

अर्थ

देखो तो सही—जिसने इसके चाचाको मार डाला, अपने सुहृद‍्-स्वजनोंको छोड़कर यह नीच दासके समान उसी विष्णुके चरणोंकी पूजा करता है! हो-न-हो, इसके रूपमें मेरे भाईको मारनेवाला विष्णु ही आ गया है॥ ३५॥

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