श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.27

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

चतुर्थ उत्तमभ्राता मनुर्नाम्ना च तामसः।

पृथुः३ ख्यातिर्नरः केतुरित्याद्या दश तत्सुताः॥ २७

caturtha uttamabhrātā manurnāmnā ca tāmasaḥ|

pṛthuḥ khyātirnaraḥ keturityādyā daśa tatsutāḥ|| 27

अर्थ

चौथे मनुका नाम था तामस। वे तीसरे मनु उत्तमके सगे भाई थे। उनके पृथु, ख्याति, नर, केतु इत्यादि दस पुत्र थे॥ २७॥✎ 654

टिप्पणियाँ

  1. ३

    प्रा० पा०—वृषः।

    (मुद्रित पृष्ठ 908)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #654 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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