श्रीशुकदेवजीने कहा—इस कल्पमें स्वायम्भुव आदि छः मन्वन्तर बीत चुके हैं। उनमेंसे पहले मन्वन्तरका मैंने वर्णन कर दिया, उसीमें देवता आदिकी उत्पत्ति हुई थी॥ ४॥
मनवोऽस्मिन्व्यतीताः षट् कल्पे स्वायम्भुवादयः।
आद्यस्ते कथितो यत्र देवादीनां च सम्भवः॥ ४
श्रीशुकदेवजीने कहा—इस कल्पमें स्वायम्भुव आदि छः मन्वन्तर बीत चुके हैं। उनमेंसे पहले मन्वन्तरका मैंने वर्णन कर दिया, उसीमें देवता आदिकी उत्पत्ति हुई थी॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 905) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/1/4/