परीक्षित्! भगवान् स्वायम्भुव मनुने समस्त कामनाओं और भोगोंसे विरक्त होकर राज्य छोड़ दिया। वे अपनी पत्नी शतरूपाके साथ तपस्या करनेके लिये वनमें चले गये॥ ७॥✎ 650
विरक्तः कामभोगेषु शतरूपापतिः प्रभुः।
विसृज्य राज्यं तपसे सभार्यो वनमाविशत्॥ ७
परीक्षित्! भगवान् स्वायम्भुव मनुने समस्त कामनाओं और भोगोंसे विरक्त होकर राज्य छोड़ दिया। वे अपनी पत्नी शतरूपाके साथ तपस्या करनेके लिये वनमें चले गये॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 906) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/1/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)