परीक्षित्! भगवान् कपिलका वर्णन मैं पहले ही (तीसरे स्कन्धमें) कर चुका हूँ। अब भगवान् यज्ञपुरुषने आकूतिके गर्भसे अवतार लेकर जो कुछ किया, उसका वर्णन करता हूँ॥ ६॥✎ 650
कृतं पुरा भगवतः कपिलस्यानुवर्णितम्।
आख्यास्ये भगवान्यज्ञो यच्चकार कुरूद्वह॥ ६
परीक्षित्! भगवान् कपिलका वर्णन मैं पहले ही (तीसरे स्कन्धमें) कर चुका हूँ। अब भगवान् यज्ञपुरुषने आकूतिके गर्भसे अवतार लेकर जो कुछ किया, उसका वर्णन करता हूँ॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 906) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/1/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)