॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.10.22
अरिष्टोऽरिष्टनेमिश्च मयश्च त्रिपुराधिपः।
अन्ये पौलोमकालेया निवातकवचादयः॥ २२
ariṣṭo'riṣṭanemiśca mayaśca tripurādhipaḥ|
anye paulomakāleyā nivātakavacādayaḥ|| 22
अर्थ
उनके चारों ओर अपने-अपने विमानोंपर सेनाकी छोटी-छोटी टुकड़ियोंके स्वामी नमुचि, शम्बर, बाण, विप्रचित्ति, अयोमुख, द्विमूर्धा, कालनाभ, प्रहेति, हेति, इल्वल, शकुनि, भूतसन्ताप, वज्रदंष्ट्र, विरोचन, हयग्रीव, शंकुशिरा, कपिल, मेघदुन्दुभि, तारक, चक्राक्ष, शुम्भ, निशुम्भ, जम्भ, उत्कल, अरिष्ट, अरिष्टनेमि, त्रिपुराधिपति मय, पौलोम कालेय और निवातकवच आदि स्थित थे॥ १९—२२॥✎ 2032 2033