श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अलब्धभागाः सोमस्य केवलं क्लेशभागिनः।

सर्व एते रणमुखे बहुशो निर्जितामराः॥ २३

alabdhabhāgāḥ somasya kevalaṃ kleśabhāginaḥ|

sarva ete raṇamukhe bahuśo nirjitāmarāḥ|| 23

अर्थ

ये सब-के-सब समुद्रमन्थनमें सम्मिलित थे। परन्तु इन्हें अमृतका भाग नहीं मिला, केवल क्लेश ही हाथ लगा था। इन सब असुरोंने एक नहीं, अनेक बार युद्धमें देवताओंको पराजित किया था॥ २३॥✎ 2032 2033

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2032 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2033 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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