परीक्षित्! क्षीरसागरके तटपर बड़ा ही रोमांचकारी और अत्यन्त भयंकर संग्राम हुआ। देवता और दैत्योंकी वह घमासान लड़ाई ही ‘देवासुर-संग्राम’ के नामसे कही जाती है॥ ५॥✎ 723724
तत्र दैवासुरो नाम रणः परमदारुणः।
रोधस्युदन्वतो राजंस्तुमुलो रोमहर्षणः॥ ५
परीक्षित्! क्षीरसागरके तटपर बड़ा ही रोमांचकारी और अत्यन्त भयंकर संग्राम हुआ। देवता और दैत्योंकी वह घमासान लड़ाई ही ‘देवासुर-संग्राम’ के नामसे कही जाती है॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 951) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)