॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.10.6
तत्रान्योन्यं सपत्नास्ते संरब्धमनसो रणे।
समासाद्यासिभिर्बाणैर्निजघ्नुर्विविधायुधैः॥ ६
tatrānyonyaṃ sapatnāste saṃrabdhamanaso raṇe|
samāsādyāsibhirbāṇairnijaghnurvividhāyudhaiḥ|| 6
अर्थ
दोनों ही एक-दूसरेके प्रबल शत्रु हो रहे थे, दोनों ही क्रोधसे भरे हुए थे। एक-दूसरेको आमने-सामने पाकर तलवार, बाण और अन्य अनेकानेक अस्त्र-शस्त्रोंसे परस्पर चोट पहुँचाने लगे॥ ६॥