श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.13

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

सखायं पतितं दृष्ट्वा जम्भो बलिसखः सुहृत्।

अभ्ययात् सौहृदं सख्युर्हतस्यापि समाचरन्॥ १३

sakhāyaṃ patitaṃ dṛṣṭvā jambho balisakhaḥ suhṛt|

abhyayāt sauhṛdaṃ sakhyurhatasyāpi samācaran|| 13

अर्थ

बलिका एक बड़ा हितैषी और घनिष्ठ मित्र जम्भासुर था। अपने मित्रके गिर जानेपर भी उनको मारनेका बदला लेनेके लिये वह इन्द्रके सामने आ खड़ा हुआ॥ १३॥

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