श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.14

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

स सिंहवाह आसाद्य गदामुद्यम्य रंहसा।

जत्रावताडयच्छक्रं गजं च सुमहाबलः१॥ १४

sa siṃhavāha āsādya gadāmudyamya raṃhasā|

jatrāvatāḍayacchakraṃ gajaṃ ca sumahābalaḥ|| 14

अर्थ

सिंहपर चढ़कर वह इन्द्रके पास पहुँच गया और बड़े वेगसे अपनी गदा उठाकर उनके जत्रुस्थान (हँसली)-पर प्रहार किया। साथ ही उस महाबलीने ऐरावतपर भी एक गदा जमायी॥ १४॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—बलम्।

    (मुद्रित पृष्ठ 959)

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